चाँदनी रात बड़ी देर के बा'द आई है

  - Saifuddin Saif

चाँदनी रात बड़ी देर के बा'द आई है
लब पे इक बात बड़ी देर के बा'द आई है

झूम कर आज ये शब-रंग लटें बिखरा दे
देख बरसात बड़ी देर के बा'द आई है

दिल-ए-मजरूह की उजड़ी हुई ख़ामोशी से
बू-ए-नग़्मात बड़ी देर के बा'द आई है

आज की रात वो आए हैं बड़ी देर के बा'द
आज की रात बड़ी देर के बा'द आई है

आह तस्कीन भी अब 'सैफ़' शब-ए-हिज्राँ में
अक्सर औक़ात बड़ी देर के बा'द आई है

  - Saifuddin Saif

More by Saifuddin Saif

As you were reading Shayari by Saifuddin Saif

    दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या
    मिलो तो आँख चुरा लो तुम्हें किसी से क्या

    हमारी लग़्ज़िश-ए-पा का ख़याल क्यूँ है तुम्हें
    तुम अपनी चाल सँभालो तुम्हें किसी से क्या

    चमक के और बढ़ाओ मिरी सियह-बख़्ती
    किसी के घर के उजालो तुम्हें किसी से क्या

    नज़र बचा के गुज़र जाओ मेरी तुर्बत से
    किसी पे ख़ाक न डालो तुम्हें किसी से क्या

    मुझे ख़ुद अपनी नज़र में बना के बेगाना
    जहाँ को अपना बना लो तुम्हें किसी से क्या

    क़रीब-ए-नज़अ' भी क्यूँ चैन ले सके कोई
    नक़ाब रुख़ से उठा लो तुम्हें किसी से क्या
    Read Full
    Saifuddin Saif
    मग़रूर थे अपनी ज़ात पर हम
    रोने लगे बात बात पर हम

    ऐ दिल तेरी मौत का भी ग़म है
    ख़ुश भी हैं तेरी नजात पर हम

    लुट जाएँगे ज़ब्त-ए-ग़म के हाथों
    मर जाएँगे अपनी बात पर हम

    ये भी तेरे ग़म का आसरा है
    हँसते हैं ग़म-ए-हयात पर हम

    क्या नाज़ था 'सैफ़' हौसले पर
    चुप हो गए एक बात पर हम
    Read Full
    Saifuddin Saif
    तुम को बेगाने भी अपनाते हैं मैं जानता हूँ
    मेरे अपने भी पराए हैं तुम्हें क्या मालूम
    Saifuddin Saif

Similar Writers

our suggestion based on Saifuddin Saif

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari