वतन ये हमारा

ज़मीं ये हमारी वतन ये हमारा
उजड़ने न देंगे चमन ये हमारा
वतन के लिए जो मेरी जान जाए
ख़ुदारा यहीं  फिर जनम लें दुबारा

जो सरहद पे अपने सरों को कटा कर
अमर हो गए जो वतन को बचाकर
वो ख़ुशबू के जैसे महकते रहेंगे
चमकते रहेंगे वो बनकर सितारा

भगत बोस सुखदेव बलिदानियों को
न भूलेंगे हम उन की क़ुर्बानियों को
वो फाँसी में भी चढ़ गए हँसते हँसते
वतन के लिए हर सितम था गवारा

तुम्हें याद करते हैं ये चाँद-तारे
तुम्हें  सरहदों की है मिट्टी पुकारे
चराग़-ए-मोहब्बत जलाते रहेंगे
न टूटेगा रिश्ता हमारा तुम्हारा

न मज़हब सिखाता है तकरार बाँटो
अगर बाँटना हो सदा प्यार बाँटो
रज़ा हो अमन सारी दुनिया में क़ाएम
ज़माने में हो हर तरफ़ भाई चारा

— SALIM RAZA REWA

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