राह पर सदाक़त की गर चला नहीं होता सच हमेशा कहने का हौसला नहीं होताकोशिशों से देता है रास्ता समुंदर भीहौसला रहे क़ाएम फिर तो क्या नहीं होता— SALIM RAZA REWA