मेरे दिल की हसरतों से ये कलाम लिख रहा हूँ

ये ग़ज़ल का शे'र पहला तेरे नाम लिख रहा हूँ

तेरी याद जब सताए मुझे नींद फिर ना आए
मेरे दिल की बात सुन ले ये पयाम लिख रहा हूँ

तेरे होंठ हैं गुलाबी तेरी आँख शरबती है
मुझे आँखों से पिला दे मैं ये जाम लिख रहा हूँ

तू ही मेरी आरज़ू है मुझे तेरी जुस्तुजू है
मेरी सुब्ह भी तू ही है तुझे शाम लिख रहा हूँ

मेरी दास्तान-ए-हसरत वो जो सुन के हँस रहे हैं
वो भी इश्क़ कर के देखें मैं तमाम लिख रहा हूँ

— Sameer Khan

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