कोई शख़्स ऐसा बनाया न होगा

ख़ुदा ने जिसे आज़माया न होगा

फ़क़त जग हँसाई के डर से हर इक ने
ग़म अपना किसी को सुनाया न होगा

मुनाफ़े की ख़्वाहिश वो क्या ही करेंगे
ख़सारा जिन्होंने उठाया न होगा

नमकपाश हैं सब इसी वास्ते फिर
उन्हें चीर के दिल दिखाया न होगा

सँभाला जिन्होंने था गिरने पे सब को
उन्हें थामने कोई आया न होगा

रफ़ाक़त में क़ाएम मिसाल उस ने की है
मदद कर के जिस ने जताया न होगा

सना भूलते हैं वही लोग हम को
जिन्हें हम ने दिल से भुलाया न होगा

— Sana Hashmi

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