Sana Hashmi

Sana Hashmi

@sanahashmi1122

Sana Hashmi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sana Hashmi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
दुआ थी ज़िंदगी गुज़रेगी इक मिसाल के साथ
मगर ये उम्र भी कटती रही मलाल के साथ

सँवार दे जो मिरा दीन और मिरी दुनिया
मिला दे कोई मुझे ऐसे ख़ुश ख़िसाल के साथ

बहिश्त छीन के आदम को दी गई थी ज़मीं
सज़ा के तौर पे आलम बसा वबाल के साथ

जवाब देने से हाज़िर जवाब बनते गए
नज़र जो हम पे उठी इक नये सवाल के साथ

ख़ुदा जो चाहे तो दुश्मन भी जाँ निसार करे
पले हैं शेर के बच्चे भी अब ग़ज़ाल के साथ

हैं जिसकी रहमतें ये ज़लज़ले भी हैं उसके
उरूज भी वही देगा मगर ज़वाल के साथ

गया सुकून, इबादत भी ख़ाक़ में जा मिली
हुआ जो इश्क़ भी हमको किसी कलाल के साथ

बिछड़ना मिलना तो लगता है कोई खेल सनम
हमें तो मिलता रहा हिज्र भी विसाल के साथ

क़दम क़दम पे हमेशा ही जिसको मात मिली
वो रुक ही जाता है अक्सर किसी ख़्याल के साथ

सना कलाम भी करती है हम ख़्याल से ही
चले न शेर की यारी किसी शग़ाल के साथ
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Sana Hashmi
मुहब्बत अब न बाक़ी है ज़माने में ख़ुदाया ख़ैर
लगे हैं सब हवस अपनी मिटाने में ख़ुदाया ख़ैर

नहीं होता गुज़ारा एक लैला पर अब आशिक़ का
लगे मजनू कई लैला फँसाने में ख़ुदाया ख़ैर

भरोसा तोड़ कर क़ाइल करेंगें फिर वही तुमको
जो माहिर हैं दलीलें सब सुनाने में ख़ुदाया ख़ैर

हमें सब याद हैं क़समें मुहब्बत की मगर ख़ुद वो
हैं आमादा सभी वादे भुलाने में ख़ुदाया ख़ैर

बहुत मुश्किल है बचना आशिक़ों से ख़ुद यहाँ वर्ना
लगेंगें तुम पे हरबे आज़माने में ख़ुदाया ख़ैर

क़दम साबित मिरा रहना मुहाल अब है मिरे यारों
सनम मुझको लगे हैं वरग़लाने में ख़ुदाया ख़ैर

बज़ाहिर औलिया इबलीस अंदर से सभी हैं पर
मगन है ख़ुद को सब अच्छा दिखाने में ख़ुदाया ख़ैर

ख़ुदा के सामने रुस्वा न हो जाऊँ यही डर है
लगी अपना #सना दामन बचाने में ख़ुदाया ख़ैर
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Sana Hashmi
अब दिल ने खुल के जीने को इसरार है किया
ख़्वाहिश का अपनी मुझसे यूँ इज़हार है किया

मैं मुतमइन ही हो के गुज़ारूंगी ज़िंदगी
हालांकि ये भी अह्द कई बार है किया

मुझको तो आशिकी का सिला ख़ूब है मिला
हक़ पर मिरे रक़ीब को हक़दार है किया

वर्ना मिरी हयात बड़ी ख़ैरियत से थी
मुझको किसी के इश्क़ ने बीमार है किया

दीवानगी से कुछ भी न हासिल हमें हुआ
जीना भी हम ने ख़ुद का ही दुश्वार है किया

कितने नक़ाब पहने हुऐ लोग हैं यहाँ
मुझको फरेबियों ने समझदार है किया

दुनिया महाज़े जंग की मानिंद अब लगे
हर जंग ख़ुद ही लड़ने को तैयार है किया

चाहत नहीं सना को किसी से भी इश्क़ की
अब ख़ुद से मैंने ख़ुद को बहुत प्यार है किया
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Sana Hashmi
वो नज़रों में फिर से समाने लगे हैं
जो हमसे ही नज़रें चुराने लगे हैं

दिये ज़ब्त के वो बुझाने लगे हैं
मेरा ज़र्फ वो आज़माने लगे हैं

जिसे हिज्र की आँधियों ने उजाड़ा
घरौंदा वही फिर बनाने लगे हैं

कभी वस्ल की आरज़ू थी सताती
कि मंज़र वही याद आने लगे हैं

रही ख़ूब वाकिफ़ छलावों से उसके
वही दिल में फिर क्यों समाने लगे हैं

भिगा ही दिया अश्क़ की बारिशों ने
मुहब्बत के फिर अब्र छाने लगे हैं

वही सर्द रातें ये बारिश की बूँदे
ये मौसम मुझे ही सताने लगे हैं

उमीदे वफ़ा क्या करें हम किसी से
यही बात दिल को बताने लगे हैं

न छेड़ो मुहब्बत के किस्से को यारों
जिसे ख़ुद से अब हम दबाने लगे हैं

ग़मों को छुपाया जहाँ से सना ने
सभी ज़ख़्म नज़रों में आने लगे हैं
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