फ़ितरतन ही मैं जी हुज़ूर नहीं
मेरा इस
में कोई क़ुसूर नहीं
बे-हयाई में कोई नूर नहीं
हुस्न आला वही जो ऊर नहीं
ज़िंदगी पुर-वक़ार गुज़रेगी
मुझ में ग़ैरत है पर ग़ुरूर नहीं
चलना-रुकना हुआ मुहाल मगर
हौसले फिर भी चूर चूर नहीं
मेरे ख़द्शे सभी दुरुस्त हुए
लोग समझे मुझे शुऊर नहीं
— Sana Hashmi














