अब दिल ने खुल के जीने को इसरार है किया
ख़्वाहिश का अपनी मुझ से यूँ इज़हार है किया
पुर-एतिमाद हो के गुज़ारूँगी ज़िंदगी
हालाँकि ये भी अहद कई बार है किया
मुझ को मोहब्बतों का सिला ख़ूब है मिला
हक़ पर मिरे रक़ीब को हक़दार है किया
वर्ना मिरी हयात बड़ी ख़ैरियत से थी
मुझ को किसी के इश्क़ ने बीमार है किया
दीवानगी से कुछ भी न हासिल हमें हुआ
जीना भी हम ने ख़ुद का ही दुश्वार है किया
कितने नक़ाब पहने हुऐ लोग हैं यहाँ
मुझ को फ़रेबियों ने समझदार है किया
दुनिया महाज़-ए-जंग की मानिंद अब लगे
हर जंग ख़ुद ही लड़ने को तैयार है किया
चाहत नहीं 'सना' को किसी से भी इश्क़ की
अब ख़ुद से मैं ने ख़ुद को बहुत प्यार है किया
— Sana Hashmi















