उन की आमद बहार लाएगी
रुख़ पे मेरे निखार लाएगी
इक झलक यार की मिरे दिल को
बे-तहाशा क़रार लाएगी
वस्ल की आरज़ू ही अब मुझ पर
इश्क़ का फिर ख़ुमार लाएगी
ज़िंदगी राह-ए-इश्क़ में मेरी
हादसे बेशुमार लाएगी
सिर्फ़ अपनों की बद-कलामी ही
अब दिलों में दरार लाएगी
आजिज़ी और इंकसारी मिरी
कोई तो ग़म गुसार लाएगी
ज़ीस्त बाज़ार से मुहब्बत के
चंद साँसें उधार लाएगी
तजरबों के सबब खिरद मेरी
ज़िंदगी में सुधार लाएगी
टूटी कश्ती ही ऐ सना इक दिन
मुझ को दरिया के पार लाएगी
— Sana Hashmi















