badan banaa liya hai saans ki nali banaani hai | बदन बना लिया है साँस की नली बनानी है

  - Sandeep dabral 'sendy'

बदन बना लिया है साँस की नली बनानी है
मुझे यहाँ नगर में गाँव की गली बनानी है

ख़बर कोई न लेता है ग़रीबों की, सो अब यहाँ
अली व तितलियों के वास्ते कली बनानी है

न धूप से, न भूख से मरे कोई नगर में, सो
कहीं चमन कहीं शजर कहीं फली बनानी है

जला है तेज़ धूप से जो याँ हे चित्रकार, उस
श्रमिक की शक्ल पूरी हू-ब-हू जली बनानी है

हैं ख़ाली हाथ आए और ख़ाली हाथ जाना हैं
सभी से मिल के रहना सब से याँ भली बनानी है

बना लो तुम पहाड़ तोड़ के मकान पर मुझे
पहाड़ तोड़ के घराट की तली बनानी है

  - Sandeep dabral 'sendy'

Gulshan Shayari

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