chhal ke is yug men vo ladki mujhko sacchi lagti hai | छल के इस युग में वो लड़की मुझको सच्ची लगती है

  - Sandeep dabral 'sendy'

छल के इस युग में वो लड़की मुझको सच्ची लगती है
इस कारण ही मुझको वो औरों से अच्छी लगती है

झुमका कैसे भूल गए तुम यार बनाना कानों में
झुमके बिन तस्वीर ज़रा उसकी फीकी सी लगती है

कंगन पायल झुमके बाली ये सारे अच्छे हैं पर
देख नज़र रुक जाती है जब बिंदी काली लगती है

सादापन इस तरह फ़ज़ाओं में हर-सू छाया उसका
ज़ीस्त मुझे यारों अपनी महकी-महकी सी लगती है

जो भी उसको देखे सैंडी उसके जानिब हो जाए
मुझ को दुनिया उसके हाथों की कठपुतली लगती है

  - Sandeep dabral 'sendy'

Dosti Shayari

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