ऐसे दीवाने संग-ए-मरमर के
हो न जाएँ कहीं ये पत्थर के
मैं हूँ सबके लिए अलग किरदार
कितने मानी हैं एक अक्षर के
तुझ को दिल भर के देख तो लेता
जा रहा था तो जाता कह कर के
— Sanjay shajar
हो न जाएँ कहीं ये पत्थर के
मैं हूँ सबके लिए अलग किरदार
कितने मानी हैं एक अक्षर के
तुझ को दिल भर के देख तो लेता
जा रहा था तो जाता कह कर के
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