कभी कोई कभी कोई रहा है
हमारा दिल कहाँ ख़ाली रहा है
ये डर है मर न जाए ये किसी दिन
ये लड़का जिस तरह से जी रहा है
तमन्नाएँ अधूरी रह गईं सब
अब आँखों में फ़क़त पानी रहा है
बताओ क्या बुरा है ज़िन्दगी में
असीरी में मज़ा आ ही रहा है
मैं मुड़कर भी उसे देखूँ न 'संजय'
प' दिल करता ये मनमानी रहा है
— Sanjay shajar















