तू निकलता नहीं निकाले से
पीव बहने लगी है छाले से
चाहता हूँ कि रोक लूँ उस को
रोक तो लूँ प किस हवाले से
तू जो छू ले तो ज़ख़्म भर जाएँ
तीरगी मरती है उजाले से
ख़र्च कर लो ये वक़्त के सिक्के
ज़ाए हो जाएँगे सँभाले से
फिर कोई ख़्वाब टूट जाता है
फिर से गिरता हूँ सात माले से
— Sanjay shajar















