main phir se ho jaaunga tanhaa ik din | मैं फिर से हो जाऊँगा तन्हा इक दिन

  - Saqi Faruqi

मैं फिर से हो जाऊँगा तन्हा इक दिन
बैन करेगा रूह का सन्नाटा इक दिन

जिन में अभी इक वहशी आग के साए हैं
वो आँखें हो जाएँगी सहरा इक दिन

बीत चुका होगा ये ख़्वाबों का मौसम
बंद मिलेगा नींद का दरवाज़ा इक दिन

मिट जाएगा सेहर तुम्हारी आँखों का
अपने पास बुला लेगी दुनिया इक दिन

डूब रहा हूँ झूट और खोट के दरिया में
जाने कहाँ ले जाए ये दरिया इक दिन

मैं भी लौट आऊँगा अपने तआ'क़ुब से
तुम भी मुझ को ढूँढ के थक जाना इक दिन

  - Saqi Faruqi

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