
हिफ़ाज़त कर रहा है तू मगर ये जान जानी है
यहाँ पर सबकी बस दो चार दिन की ही कहानी है
मैं था तेरे मुक़द्दर में नहीं तो सब्र कर ऐ यार
ये मेरा या न तेरा फ़ैसला है आसमानी है
— Sayeed Khan
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