तुम ने बस बाज़ार में जल्वे देखे हैं
हम ने भीड़ में खोते बच्चे देखे हैं
इन आँखों से दरिया फूटना लाज़िम था
इन आँखों ने मंज़र ऐसे देखे हैं
औरों ने दौलत शोहरत भी चाही है
हम ने तो बस उस के सपने देखे हैं
उस की ख़ातिर जंग नहीं देखी, लेकिन
कालेज में सब लड़के लड़ते देखे हैं
— Shaad Imran















