वो जिस के पास में पैसा नहीं है
ख़ुदा उस का कभी होता नहीं है
ग़रीबी का हमारी हाल सुनलो
लटक जाने को भी पंखा नहीं है
तुझे हम ख़ुश रखेंगे ज़िंदगी भर
ये वा'दा है, मगर दावा नहीं है
कहीं से मुझ से सरवत कह रहे हैं
तुम्हारे पास अब रस्ता नहीं है
ग़ज़ल में बस उदासी भर रखी है
ज़रा भी हुस्न का चर्चा नहीं है
तुम्हें शायद बहुत से 'शाद' दुख हो
तेरे चहरे से पर लगता नहीं है
— Shaad Imran















