हुस्न अपना हिजाब में रखना
सारा जलवा नक़ाब में रखना
मेरी चाहत को छोड़ना न कभी
फूल कोई किताब में रखना
जलपरी तुमको लोग समझेंगे
पाँव अपना न आब में रखना
रिन्द बहके न रेहगुज़ारो में
इतनी मस्ती शराब में रखना
मेरी उल्फत के तुम फ़साने को
'इश्क़ की हर किताब में रखना
जिसकी ताबीर में हक़ीक़त हो
ऐसी तासीर ख़्वाब में रखना
लग न जाए नज़र हरीफ़ों की
अपना चेहरा नक़ाब में रखना
बस में तेरे नहीं है अब शादान
ज़ख़्म उनके हिसाब में रखना
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