हुस्न अपना हिजाब में रखना

सारा जलवा नक़ाब में रखना

मेरी चाहत को छोड़ना न कभी
फूल कोई किताब में रखना

जलपरी तुम को लोग समझेंगे
पाँव अपना न आब में रखना

रिन्द बहके न रेहगुज़ारो में
इतनी मस्ती शराब में रखना

मेरी उल्फत के तुम फ़साने को
इश्क़ की हर किताब में रखना

जिस की ता'बीर में हक़ीक़त हो
ऐसी तासीर ख़्वाब में रखना

लग न जाए नज़र हरीफ़ों की
अपना चेहरा नक़ाब में रखना

बस में तेरे नहीं है अब शादान
ज़ख़्म उन के हिसाब में रखना

— Shadan Ahsan Marehrvi

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