दिल को मेरे मलाल कैसा है
अलग़रज़ ये ज़वाल कैसा है
हिज्र तू ने जिया नहीं वाइज़
क्या कहूँ तुझ से हाल कैसा है
मेरी हर बात से गिला है उसे
जाने वो हमख़याल कैसा है
यूँ करे रब कि जब पड़े मुश्किल
मुझ से पूछे कि हाल कैसा है
वक़्त-ए-मुश्किल में हौसला रखना
चल खड़ा हो निढ़ाल कैसा है
बारहा सोचता हूँ मैं अक्सर
जाने मेरा ख़याल कैसा है
इक बिरहमन ने फिर कहा अच्छा
देखते हैं कि साल कैसा है
— Shadan Ahsan Marehrvi















