है क्या ज़रूरी मिरा ऐसा करना
सब भूल कर बस तुझे सोचा करना
आग़ोश में अपनी तुम मुझ को लेना
हम गर मिले यार बस इतना करना
दिल पर मिरे ज़ख़्म सा करता है ये
मुझ से नज़र तुम नहीं फेरा करना
ख़ुद को ये कहना कि तुझ को न सोचें
हर वक़्त फिर तुझ को ही सोचा करना
— Shahanwaz Ansari















