माज़रत कर रहा हूँ वा'दा नहीं
इतनी शर्मिंदगी ज़ियादा नहीं
ख़ूब-सूरत तो वो बहुत है मगर
ख़ुद-कुशी का मेरा इरादा नहीं
उस ने सपने सजा लिए हैं बहुत
और मैं कोई शाहज़ादा नहीं
— Shakeel Jamali
इतनी शर्मिंदगी ज़ियादा नहीं
ख़ूब-सूरत तो वो बहुत है मगर
ख़ुद-कुशी का मेरा इरादा नहीं
उस ने सपने सजा लिए हैं बहुत
और मैं कोई शाहज़ादा नहीं
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