ख़ुद पे रोते हैं प्यार आता है
काम कब ग़म-गुसार आता है
इस क़दर तू अजीज़ है मुझ को
तेरे ग़ुस्से पे प्यार आता है
ये जो दरिया है मेरी आँखों में
तू नज़र इस के पार आता है
सब सही एक दम नहीं होता
आते आते सुधार आता है
कोई उस पार से नहीं आता
बारहा दिल पुकार आता है
घर किसी का भी ख़ाक होता हो
सब की जानिब ग़ुबार आता है
आसमाँ से हो ज़ोर की बारिश
फ़स्ल पर तब निखार आता है
— shampa andaliib















