ye duniya matlabi hai koii bhi apna nahin baabul | ये दुनिया मतलबी है कोई भी अपना नहीं बाबुल

  - shampa andaliib

ये दुनिया मतलबी है कोई भी अपना नहीं बाबुल
जो अच्छा दूर से है पास से अच्छा नहीं बाबुल

तुम्हारे पास रहती थी बहुत आज़ाद रहती थी
गुज़िश्ता वक़्त क्यूँँ वापस कभी आता नहीं बाबुल

मैं अब के बार भी हर बार के जैसे गई थी घर
अचानक आँख भर आई तुम्हें देखा नहीं बाबुल

कोई दुख दर्द से मेरे यहाँ वाक़िफ़ नहीं है अब
मिरे दिल में कोई ख़्वाहिश कोई सपना नहीं बाबुल

बहुत उम्मीद थीं दिल में बहुत सपने संजोए थे
अचानक सब फ़ना होगा कभी सोचा नहीं बाबुल

  - shampa andaliib

Udas Shayari

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