soona aangan neend men aise chaunk utha hai | सूना आँगन नींद में ऐसे चौंक उठा है

  - Shariq Kaifi

सूना आँगन नींद में ऐसे चौंक उठा है
सोते में भी जैसे कोई सिसकी लेता है

घर में तो इस माहौल का मैं आदी हूँ लेकिन
बाज़ारों की वीरानी से दम घुटता है

मुद्दत से मैं सोच रहा था अब समझा हूँ
जेब और आँख के ख़ाली-पन में क्या रिश्ता है

इतने लोग मुझे रुख़्सत करने आए हैं
घर वापस जाना भी तमाशा सा लगता है

लोग तो अपनी जानिब से कुछ जोड़ ही लेंगे
इतनी अधूरी बातें हैं वो क्यूँँ करता है

अपनी क्या इन रस्तों के बारे में सोचूँ
उन का सफ़र तो मेरी 'उम्र से भी लम्बा है

उस की आँखों से ओझल मत होना 'शारिक़'
पीछा करने वाला बहुत तन्हा होता है

  - Shariq Kaifi

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