tarah tarah se mira dil badhaaya jaata hai | तरह तरह से मिरा दिल बढ़ाया जाता है

  - Shariq Kaifi

तरह तरह से मिरा दिल बढ़ाया जाता है
मगर कहे से कहीं मुस्कुराया जाता है

अभी मैं सोच रहा था कि कुछ कहूँ तुझ से
कि देखता हूँ तिरा घर सजाया जाता है

गुनाहगारों में बैठे तो इंकिशाफ़ हुआ
ख़ुदास अब भी बहुत ख़ौफ़ खाया जाता है

नए नए वो अदाकार जानते ही न थे
कि पर्दा गिरते ही सब भूल जाया जाता है

तवक़्क़ुआत का यूँँ भी ख़याल रखता हूँ
बड़े यक़ीं से मुझे आज़माया जाता है

तमाम 'उम्र मिलाई जुनूँ की ताल से ताल
ये गीत सब से कहाँ गुनगुनाया जाता है

अब इस तरह की मोहब्बत कभी न हो शायद
कि दरमियाँ में कहीं जिस्म आया जाता है

समझ में आए न आए ये कुछ हुआ है ज़रूर
यक़ीं जो तुझ पे मिरा डगमगाया जाता है

  - Shariq Kaifi

Khuda Shayari

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