हाँ हिज्र भी बिताई हम ने शराब पी कर
कुछ यूँ वफ़ा निभाई हम ने शराब पी कर
मुश्किल बहुत हुई थी हम को बिछड़ के तुम से
फिर भी सही जुदाई हम ने शराब पी कर
नाज़ुक बदन के उस के चर्चे बहुत हुए तो
फिर की ग़ज़ल-सराई हम ने शराब पी कर
पामाल दुनिया 'साहिर' अब चाहिए किसे फिर
दुनिया नई बनाई हम ने शराब पी कर
— Sahir banarasi















