इशारों इशारों में क्या कह दिया

ये दिल क्यूँ हमारा बहकने लगा

फ़क़ीरों के हक़ में मुहब्बत नहीं
ये कह कर हमें वो दिलासा दिया

कभी मुझ से भी रू-ब-रू हो ख़ुदा
कभी तो हमारी भी सुन तू सदा

मियाँ ये वफ़ादारी की बात को
शिगूफ़ा कहूँ या कहूँ पैंतरा

न तुम ने कभी मुड़ के देखा हमें
न हम ने कभी कुछ भी तुम को कहा

ये दुनिया भी 'साहिर' तो तेरी नहीं
न तू भी कभी भी यहाँ का हुआ

— Sahir banarasi

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