देता नहीं था छाँव मगर रख लिया गयाईंधन बनेगा बूढ़ा शजर रख लिया गयाआँखों में उम्र भर की मसाफ़त समेट करघर जा रहा हूँ मुझ को अगर रख लिया गयामुझ को थमा दिया गया क़िस्मत का फ़ैसलाऔर मेरी मेहनतों का समर रख लिया गया— Shaukat Fehmi