वो एक शख़्स किसी तौर जो मेरा न हुआ मेरी बला से किसी का अगर हुआ न हुआमुझे फ़िराक़ ने घेरा तेरे विसाल के बीचमैं एक मचान पे बैठे हुए निशाना हुआइसीलिए मेरे रस्ते में शाम आई हैमैं अपनी सम्त बड़ी देर से रवाना हुआ— Shaukat Fehmi