
माना उस के हाल पर उस को मैं यूँँही छोड़ आया
ये नहीं लेकिन कि रिश्ता ही मैं उस से तोड़ आया
वो कहीं पर तो मिलेगा मुझ से, इतना तो यक़ीं है
इस लिए कल ख़ुद को रस्ते पर कहीं मैं छोड़ आया
— karan singh rajput
Other sher from the same pen
Shers of behan.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling