ख़ामियाँ मेरी बताये जा रहा है
आईना सब कुछ दिखाए जा रहा है
छोड़ कर मैं जा रहा हूँ उस को लेकिन
वो है के मुझ को बुलाये जा रहा है
मैं भी इक रिश्ता निभाये जा रहा हूँ
वो भी इक रिश्ता निभाये जा रहा है
एक लड़का याद में पागल किसी की
लोगों को ग़ज़ले सुनाए जा रहा है
उस के मैं नज़दीक आना चाहता हूँ
फ़ासला पर वो बढ़ाये जा रहा है
पड़ रहा था दर्द दिल का, कोई बोला
शे'र ये कैसे सुनाए जा रहा है
याद करने में लगा हूँ उस को मैं और
वो है मुझ को सब भुलाए जा रहा है
— karan singh rajput















