यही हम को गुमाँ अक्सर रहे हैंहमारे नाम वो जाँ कर रहे हैंअभी है दौर-ए-आग़ाज़-ए-मोहब्बतवो मेरा दिल दुखाते डर रहे हैंवफ़ा उन की तबीयत में नहीं हैवो कोशिश तो यक़ीनन कर रहे हैंमेरी रुस्वाई हो जाए न ज़िंदावो मेरा नाम ले कर मर रहे हैंकरेंगे शा'इरी भी अगले दम परअभी तो हम मोहब्बत कर रहे हैं— Shikha Pachouly