सब हदों से गुज़र गई हो क्या
आज फिर उस के घर गई हो क्या
दफ़्न हो कर भी दिल धड़कता है
तुम मोहब्बत में मर गई हो क्या
आ गई फिर से मेरी बातों में
मुझ को डर था सुधर गई हो क्या
राह इक ख़ुद तलक भी आती है
सच बताना उधर गई हो क्या
— Shikha Pachouly
आज फिर उस के घर गई हो क्या
दफ़्न हो कर भी दिल धड़कता है
तुम मोहब्बत में मर गई हो क्या
आ गई फिर से मेरी बातों में
मुझ को डर था सुधर गई हो क्या
राह इक ख़ुद तलक भी आती है
सच बताना उधर गई हो क्या
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