कुछ सुनाओ कि जी नहीं लगता
गुन गुनाओ कि जी नहीं लगता
धड़कने भी ज़रा तो रक़्स करें
पास आओ कि जी नहीं लगता
मुझ पे हक़ है तुम्हारा जाने जाँ
हक़ जताओ कि जी नहीं लगता
मुझ से इस्लाह लो रक़ीबों पर
जी जलाओ कि जी नहीं लगता
ख़ुद को कितना मैं तोड़ सकती हूँ
आज़माओ कि जी नहीं लगता
अब न तारों से रात मानेगी
चाँद लाओ कि जी नहीं लगता
— Shikha Pachouly















