कह दिया तो बात से मुकरे नहीं
तीर ज्यूँ चल जाए तो मुड़ते नहीं
मुझ को मंज़िल तक तो मेरी छोड़ दो
लाश घर में देर तक रखते नहीं
इस लिए भी काँट फेंकेंगे मुझे
फल सभी पेड़ों पे तो लगते नहीं
जो सियासत में हैं बैठे देखना
उन के बेटे जंग में उतरे नहीं
वस्ल की बारिश तो हम ने चाही पर
वक़्त के बादल कभी लौटे नहीं
— Shivam Rathore















