कठिन तो है कठिन होकर सरल होना
सभी के बस का थोड़े है कमल होना
यही रस्ता है रिश्तों को बचाने का
अना को छोड़ बातों की पहल होना
वो मेरी जीत का दम घोंट कर हैं ख़ुश
जो सह पाते नहीं ख़ुद का विफल होना
भले पत्थर है बाहरस मगर मानो
पता है बाप को कैसे तरल होना
ये क्या फ़ितरत है आँखों की अजब देखो
ख़ुशी में और ग़म में भी सजल होना
— Shivam Rathore















