
फ़क़त हैं चार दीवारें वो कोई घर नहीं यारो
जहाँ बेटे को अपने बाप का ही डर नहीं यारो
अना भर के दिलों में क़त्ल हम रिश्तों का करते हैं
मुहब्बत मर रही है और हम को डर नहीं यारो
— Shivam Rathore
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