ख़ुदा आँखों में ऐसी रौशनाई दे
मुझे अनजान का भी ग़म दिखाई दे
ज़रूरत है मुहब्बत की ज़माने को
बदन की क़ैदस इस को रिहाई दे
ये मेरा ख़्वाब है दुनिया बने जन्नत
हक़ीक़त कर सकूँ वो रहनुमाई दे
तमन्ना फूल की मैं ने नहीं रक्खी
मुझे उस का ही बस दस्त-ए-हिनाई दे
कफ़न को एक कौड़ी तक नहीं चाहूँ
मुझे दौलत की चाहत से जुदाई दे
हुआ दस्तार से पा-पोश तक तेरा
ये तेरी जीत है ख़ुद को बधाई दे
— Shivam Rathore















