मैं इस दुनिया के साँचे में नहीं आता
वो लड़का हूँ जो अच्छे में नहीं आता
ज़मीं-ए-दिल तुम्हारी है बहुत छोटी
हमारा इश्क़ रकबे में नहीं आता
किसी के फ़ायदे से दुख नहीं मुझ को
तभी तो ख़ुद मैं घाटे में नहीं आता
मैं अपनी जीत अब साबित करूँ कैसे
ये नंबर मेरे पाँसे में नहीं आता
अगर सीढ़ी बना तो आ भी सकता हूँ
मैं पत्थर बन के रस्ते में नहीं आता
ज़मीनें लड़ झगड़ के छीन लेते हैं
वो बूढ़ा बाप हिस्से में नहीं आता
हसीं चेहरे शराबी नैन अड़चन है
मगर मैं इन के झाँसे में नहीं आता
— Shivam Rathore















