तेरी राहों को सजाना है चले जाना है
मुझ को बस प्यार निभाना है चले जाना है
क्या गुज़रती है दिवानों पे तुम्हें क्या मालूम
तुम ने तो हाथ छुड़ाना है चले जाना है
बन सँवरना तो तेरी ख़ुद की है ज़िम्मेदारी
मुझ को आईना दिखाना है चले जाना है
लोग मुझ जैसे हों देखे नहीं जाते सो मुझे
बिछड़े लोगों को मिलाना है चले जाना है
मुझ को इक उम्र बितानी है तेरी याद के साथ
तुझ को तो ख़्वाब दिखाना है चले जाना है
ज़िन्दगी तुझ से ज़रा एक मुलाक़ात के बा़द
मुझ को सामान उठाना है चले जाना है
— Shivang Tiwari















