"सफ़र"
ऐ मेरी जान मैं खोने को चला हूँ ख़ुद को
फिर मिलूँगा कभी इस दिल ने इजाज़त दी तो
फिर मिलूँगा कभी ये दर्द भुला पाया तो
फिर मिलूँगा मैं ख़ुद को ढूँढ़ कर ले आया तो
पर ये हालात बताते हैं सफ़र लम्बा है
लौटते वक़्त है मुमकिन कि कफ़न में आऊँ
तुझ से मिलने मैं किसी और बदन में आऊँ
— Shivang Tiwari















