अब मेरी भी ऐसी हो क़िस्मत ज़रूरी तो नहींहुस्न की मुझ को मिले उल्फ़त ज़रूरी तो नहींगर जहन्नुम ही रही है ज़िन्दगी सारी मेरीबा'द मरने के मिले जन्नत ज़रूरी तो नहीं— Shivang Tiwari