नज़र का तीर है देखो तुम्हारी ओर आएगासँभलना गर नहीं आया जिगर के पार जाएगाअगर मिलता रहेगा तू मुसलसल रोज़ ही उस सेबिछड़ने और मिलने का मज़ा क्या ख़ाक पाएगा— Shivang Tiwari