जहाँ से ग़म छुपाना पड़ रहा है
उसे कहके बताना पड़ रहा है
जलाना चाहता था शब को तेरी
लिहाज़ा दिल जलाना पड़ रहा है
ख़बर है छोड़ जाओगे किसी दिन
सो तुम को आज़माना पड़ रहा है
लकीरों में नहीं है नाम तेरा
हथेली से मिटाना पड़ रहा है
उजालों का सफ़र है और मुझ को
उसे रस्ता दिखाना पड़ रहा है
किसी से रूठने का ये सबब है
मुझे उस को मनाना पड़ रहा है
— Shubhangi Bharti















