ख़त्म होते हैं सभी अरमान तेरे बा'द में
हम सभी को देखते हैं जान तेरे बा'द में
तू घड़ी को देखता रहता है मेरे साथ में
देख लेंगे हम नफ़ा नुक़सान तेरे बा'द में
दिल मुख़ातिब रोज़ होने से रहा सो देख लो
मेरे मरने के भी हैं इम्कान तेरे बा'द में
दफ़्न होते हैं कई अरमाॅं यहाॅं पे रोज़ ही
कौन आएगा यहाॅं पे जान तेरे बा'द में
तू यक़ीनन लाज़मी है रात दिन और ख़्वाब में
हो रहे हैं लोग भी अंजान तेरे बा'द में
जो ख़ुदाई है यहाॅं पे सिर्फ़ तेरे वास्ते
कौन पूछेगा यहाॅं इंसान तेरे बा'द में
— Shubhangi Bharti















