जो भी उसे फ़रियाद हो
हल हो अगर संवाद हो
वो लब कहें इरशाद तो
ये शे'र भी आबाद हो
हर साँस का भी दम घुटे
इक साँस भी बर्बाद हो
अपने परों को नोंचता
पंछी कभी आज़ाद हो
अब छोड़ के अपनी अना
जा इश्क़ कर बर्बाद हो
— Shubh Mathur
हल हो अगर संवाद हो
वो लब कहें इरशाद तो
ये शे'र भी आबाद हो
हर साँस का भी दम घुटे
इक साँस भी बर्बाद हो
अपने परों को नोंचता
पंछी कभी आज़ाद हो
अब छोड़ के अपनी अना
जा इश्क़ कर बर्बाद हो
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