दिन ब दिन बेहाल होती जा रही है
ज़िन्दगी जंजाल होती जा रही है
दर्द दुख अवसादमय है एकदम से
ख़ुशियों से कंगाल होती जा रही है
रोज़ थप्पड़ खा रही है ठोकरों की
हर पहर अब लाल होती जा रही है
सह रही तानों की अब तलवार हर दिन
हूँ ब हूँ ये ढाल होती जा रही है
हर क़दम बच बचके रखना पड़ रहा है
राह तो विक़राल होती जा रही है
पूछिए मत हाल मेरी ज़िन्दगी का
दिन ब दिन बेहाल होती जा रही है
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