ham itnaa bandagi men kho chuke hain | हम इतना बंदगी में खो चुके हैं

  - Sohil Barelvi

हम इतना बंदगी में खो चुके हैं
ख़ुदास बात तक करने लगे हैं

खिलौने सच में महँगे हो गए हैं
यहाँ सब दिल से मेरे खेलते हैं

वबा फैली है ऐसी आसमाँ में
परिंदे सब ज़मीं पर आ गिरे हैं

सुकूँ की आस में सहरा में आया
यहाँ भी पेड़ सब रुठे खड़े हैं

अचानक आ किसी शब देख आ कर
बड़े मशहूर अपने रत'जगे हैं

कोई दूजा नहीं नज़दीक मेरे
मेरे जो राब्ते हैं आपसे हैं

मिज़ाज अपना जहाँ से मुख़्तलिफ़ है
बहुत कम लोगों से हम बोलते हैं

मेरा रोना भी सोहिल मोज़िजा है
ख़िज़ाँ में फूल कुछ खिलने लगे हैं

  - Sohil Barelvi

Gulshan Shayari

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