vo shakhs zindagi tha faqat aarzoo nahin | वो शख़्स ज़िंदगी था फ़क़त आरज़ू नहीं

  - Sohil Barelvi

वो शख़्स ज़िंदगी था फ़क़त आरज़ू नहीं
जो आज जा-ब-जा है मगर रू-ब-रू नहीं

मैं इसलिए उदास हूँ ख़ुश-हाल वक़्त में
सब कुछ है मेरे पास मगर यार तू नहीं

कितना भी मुँह से बोलें मगर जानता हूँ मैं
दिल से यहाँ पे लोग सभी ख़ूब-रू नहीं

मैं जो हूँ वो हूँ छोड़ मुझे और बात सुन
तेरी भी कोई ख़ास यहाँ आबरू नहीं

लगता है ज़िंदगी है किसी और शय का नाम
फिलहाल मुझ को ज़िंदगी की जुस्तुजू नहीं

  - Sohil Barelvi

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